उस दिन रेल में...

अमूमन हर भारतीय की एक कहानी रेलगाड़ी से जुड़ी होती है... कई ऐसे वाक़्ये होते हैं जो उस सवारी गाड़ी में लकड़ी की उस सीट को हमेशा के लिए हमारे ज़हन में बसा देते हैं... रेल में उन्ही यादगार सफ़र को आप और हम यहां बाटेंगे...

Sunday, June 7, 2009

रेल में एक मुसीबत

इस बार के सफ़र में मैंने एक तकलीफ़ महसूस की... रेल के स्लीपर कोच में अब 72 की जगह 84 बर्थ बना दिए गए हैं.. साइड में भी दो की जगह तीन बर्थ... और कोच के अंत में तीन अतिरिक्त सीटें... इस तरह से बढ़ी हुई सीटों से कोच में लोगों की संख्या बढ़ जाती है... वेटिंग और आरएसीवाले भी होते हैं... साथ में जनरल टिकटवाले भी फाइन कटवाकर स्लीपर में सफर करते हैं.. कुल मिलाकर 84 के बर्थ वाले कोच में करीब 150 लोग होते हैं... यानि कोच पूरी तरह से खचाखच भरा रहता है.. जिससे घुटन जैसा माहौल हो जाता है.. अगर आपको खिड़की के पास बैठने को न मिले तो आपको सांस लेने में भी तकलीफ़ होगी... और गर्मी में तो शाम हो या रात.. या रेलगाड़ी अपनी पूरी रफ़्तार में बाहर की हवा अंदर नहीं आ पाती... नतीजा ये होता है कि पूरे सफ़र में पसीने से भीगे रहते हैं...


इस तरह की व्यवस्था में दूसरी सबसे बड़ी समस्या ये है कि कोच में 84 सीटें तो कर दी गईं.. लेकिन रेलवे के रिज़र्वेशन सिस्टम में नया सॉफ़्टवेयर नहीं डाला गया है.. इससे होता ये है कि कम्प्यूटर से रिज़र्वेशन 72 सीटों के हिसाब से होता है... और जब फाइनल चार्ट निकलता है.. तो जो सीट नम्बर आपको टिकट पर अलाट होता है.. वो बदल जाता है... इसका मतलब अगर आप सफ़र करने के लिए ट्रेन में चढ़ते हैं तो आपकी सीट पर कोई और बैठा होगा.. और उसके पास भी उसी सीट का रिज़र्वेशन होगा.. नतीजा ये होता है कि अगर दोनों में से किसी का दिमाग़ गरम हुआ तो मार-पीट तक की नौबत आ जाएगी...

मेरे सामने की बात है टीटी ने एक शख़्स के टिकट पर उसका सीट नम्बर बदला जो दूसरे कोच में था... वो अपनी सीट पर गया तो पता चला वहां पहले से कोई बैठा हुआ था.. वो हटने को तैयार नहीं था... वो व्यक्ति परेशान होकर टीटी के पास दोबारा आया और शिक़ायत की तो टीटी ने बोला “तुम लोग जाओ आपस में लड़ के मर जाओ मैं अब इस कोच की लिस्ट सही कर लूंगा तभी आउंगा” उसके बाद टीटी महोदया लालू यादव को गाली देना शुरु कर दिए.. एक वक़्त के लिए उसकी बात सही लगी कि एक कोच की लिस्ट सही करने में घंटों लग जाते हैं.. लेकिन अगले वक़्त ये लगा कि ये सिस्टम तो काफी ख़तरनाक है.. लोग सही में आपस में लड़ जाएंगे...

अब सुनने में आया है कि नई रेल मंत्री ममता बनर्जी साइड में लगनेवाले एक एक्सट्रा बर्थ को बंद करने जा रही हैं... अब बात ये है कि हज़ारों कोचों में साइड बर्थ बढ़ाकर नया कोच बनाया गया... इसमें करोड़ों या अरबों खर्च हुए होंगे.. और अब इन बर्थ्स को हटाया जाएगा... इसमें भी करोड़ों खर्च होंगे.. यानि लोगों का ही पैसा खर्च होगा...

1 comments:

venus kesari said...

ये तो पुरानी खबर है नई खबर ये है की अब बढाई गई बर्थ को एक एक करके हटाया जा रहा है :)

वीनस केसरी

Contact